सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर सुनाया अंतरिम आदेश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) कानून 2024 की कुछ धाराओं पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब कलेक्टर प्रॉपर्टी विवादों का निपटारा नहीं कर सकेंगे। यह रोक तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक कानून की संवैधानिक वैधता पर अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती।
कलेक्टर को नहीं मिलेगा व्यक्तिगत अधिकारों पर फैसला करने का अधिकार
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों का निर्णय किसी प्रशासनिक अधिकारी को नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कलेक्टर को दी गई शक्तियों से जुड़े प्रावधानों पर रोक लगाई है।
वक्फ बनाने के लिए 5 साल की अनिवार्यता पर रोकसुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वक्फ करने के लिए 5 साल तक इस्लाम की प्रैक्टिस करने की अनिवार्यता असंवैधानिक प्रतीत होती है। इसलिए इस प्रावधान पर भी अंतरिम रोक लगा दी गई है।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की सीमा तय
अदालत ने वक्फ निकायों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने वाले प्रावधान पर भी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि वक्फ बोर्ड में 3 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल नहीं होंगे। वहीं, वक्फ परिषदों में कुल 4 से अधिक गैर-मुस्लिमों को शामिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कोर्ट का रुख: कानून को पूरी तरह असंवैधानिक नहीं ठहराया
सीजेआई बीआर गवई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि “कानून की संवैधानिकता के पक्ष में पूर्वधारणा रहती है। हस्तक्षेप केवल दुर्लभ मामलों में किया जाता है।” सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि पूरे वक्फ कानून को असंवैधानिक ठहराने का कोई आधार नहीं है, लेकिन विवादित धाराओं को अंतरिम राहत दी गई है।
फिलहाल लागू रहेगा अंतरिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अंतिम निर्णय आने तक लागू रहेगा। अब कलेक्टर न तो प्रॉपर्टी विवादों पर फैसला ले सकेंगे और न ही नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर सकेंगे।
















